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गृह मंत्रालय ने कहा-प्रवासी लोगों को कम से कम 14 दिन पृथक निगरानी में रखा जाए

गृह मंत्रालय ने कहा-प्रवासी लोगों को कम से कम 14 दिन पृथक निगरानी में रखा जाए


केन्‍द्र ने राज्‍य सरकारों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों को प्रवासी कामगारों का पलायन रोकने के लिए सीमाएं प्रभावी ढंग से सील करने का निर्देश दिया है। पूर्णबंदी के कारण फंसे जरूरतमंद लोगों और निर्धनों के लिए अस्‍थायी आश्रय तथा भोजन और आवश्‍यक सुविधाएं मुहैया कराने का भी आदेश दिया गया है। गृह मंत्रालय ने कल जारी निर्देशों में कहा कि प्रवासी कामगार जो अपने गृह नगर जाने के लिए निकल चुके हैं उन्‍हें संबंधित राज्‍यों के निकटतम आश्रय स्‍थलों पर रोका जाए और कोविड-19 के मद्देनजर कम से कम 14 दिन तक अलग निगरानी में रखा जाए।


मंत्रालय ने विभिन्‍न उद्योग, दुकान और वाणिज्यिक प्रतिष्‍ठानों सहित सभी नियोक्‍ताओं को अपने कामगारों के पारिश्रमिक का बिना किसी कटौती के नियत समय पर भुगतान करने को कहा है। कामगारों के मकान मालिकों को भी एक महीने का किराया नहीं लेने का निर्देश दिया गया है। गृह मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव पुण्‍य सलिला श्रीवास्‍तव ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी।

कैबिनेट सचिव राजीव गॉबा और केन्‍द्रीय गृह सचिव अजय भल्‍ला ने कल राज्‍य के मुख्‍य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बैठक की।

 
उधर, बिहार सरकार ने राज्‍य की सीमा पर फंसे प्रवासी कामगारों को उनके पैतृक स्‍थान पर भेजने का निर्णय लिया। इससे पहले राज्‍य सरकार ने बाहरी राज्‍यों से आने वाले कामगारों को सीमा क्षेत्र में 14 दिन के लिए आइसोलेशन में रखने को कहा था। राज्‍य के आपदा विभाग के प्रमुख सचिव प्रत्‍यामृत ने कहा कि राज्‍य की सीमा पर रह रहे मजदूरों की समस्‍या को देखते हुए उन्‍हें उनके गांवों में भेजा जाएगा। उन्‍होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों को भेजने के लिए साढे पांच सौ से अधिक बसों की व्‍यवस्‍था की गई है और उन्‍हें चरणबद्ध तरीके से भेजा जाएगा।

इस बीच कामगारों को उत्‍तर प्रदेश, झारखण्‍ड, पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा पर बने आपदा राहत शिविरों में रखा जाएगा। प्रवासी मजदूरों की सूची तैयार की जा रही है और भेजने से पूर्व उनका पंजीकरण भी कराया जाएगा। उनके स्‍वास्‍थ्‍य की भी जांच होगी। भेजे गए प्रवासी मजदूरों को उनके गांव में भी 14 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा जाएगा।

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